धनक -THE RAIN BOW

जीवन अनेक रंगों में रंगा मिलता है ;जीवन रंगो में रंगे धनक को सुधि पाठकों के लिए समर्पित करता हूँ ; धन्यवाद DHANAK.THERAINBOW KITAB PAANAY KE LIYE SAMPRK KREIN 9814087063 EMAIL I.D. IS DHANAKTHERAINBOW @GMAIL.COM

13 July, 2009












दीप्काव्यन्जली , अनुभूतियों को शब्दों का कलेवर दे कर कुछ कहने कि आकांक्षा है । कविता को मन में धारण करने वाले सुधि जनो का हार्दिक अभिनंदन ।




१।

मेरा दिलबर हसीन नही बेशक
कोई उस सा कहीं नहीं बेशक ।


वो कही की नही है शेह्जादी,
वो है दिल की मेरे खुशी बेशक ।



आँखें उसकी न शरबती न सही ,

उस की आँखों में हूँ में ही बेशक ।



उसकी आवाज़ में खनक न सही ,

करती है वो मेरी कही बेशक ।


दीप बन कर कभी जो मैं आया ,

ज्योति बन कर के वो जली बेशक ।

दीप जीरवी ९८१५५२४६००




2

दिल दिल है शीशा नहीं शीशे से भी नाजुक दिल ।
ये दिल दिल का साथी है ये दिल दिल का है कातिल ।

यार तुम्हारी बात कहू यार तुम्ही तो हो मेरे ।

तुम्ही हो जीवन मेरा ,तुम्ही जीवन का हासिल ।

तेरे इदल की कहता हू तेरे दिल की सुनता हु

मेरे दिल की जाने न, क्यों हो मुझ से तू गाफिल ।b







3

अकेला नही हूँ पर तन्हा हूँ

दरया होकर भी प्यासा हूँ ।

मरती चिडिया देखूं रो दूँ ,

बेशक मै सब में हंसता हूँ ।

तू सेठानी बेशक बेशक ,

मैं याचक दर पर आया हूँ ।

दाज के लिए दरवाजे पर

बैठी बेटी का पापा हूँ ।

बूढे बाप के खाली बेटे की

लाश उठाते में हाफा हूँ ।

श्वासों की हूँ आवागमन मैं

लोथ हूँ , लाश हूँ एक गाथा हूँ ।










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